वाराणसी, जनवरी 9 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। भगवान श्रीराम मानव रूप अवतरण दशरथ पुत्र के रूप में हुआ। साथ ही श्रीराम जटायु के दत्तक पुत्र भी थे। उसी अधिकार से प्रभु श्रीराम ने जटायु का अंतिम संस्कार किया था। श्रीराम चरित मानस के इस रोचक प्रसंग की चर्चा गुरुवार को गुरुधाम स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में हुई। आचार्य रामानंदाचार्य की 726वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीराम कथा में जगद्गुरु डॉ.रामकमलाचार्य वेदांती प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने बड़े ही सुरुचिपूर्ण तरीके से इस प्रसंग को विस्तार दिया। उन्होंने कहा कि जटायु राजा दशरथ के मित्र थे। जब शनि की कुदृष्टि के कारण राजा दशरथ का रथ भस्म हो गया और वह आकाश से धरती की ओर गिरने लगे तो उस समय जटायु ने ही राजा दशरथ के प्राणों की रक्षा की थी। इस परोपकार के बदले जब राजा दशरथ ने जटायु से कुछ मांगने ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.