नई दिल्ली, अगस्त 11 -- कोलकाता हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा कि जजों को 'खून की प्यास' वाला नजरिया नहीं अपनाना चाहिए। दरअसल, एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई गई थी जिसने अपने मामा की हत्या कर दी थी। आफताब आलम बनाम राज्य मामले में एचसी ने सजा को उम्रकैद में बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस उदय कुमार की पीठ ने कहा, 'जजों को सावधान करते हुए कहा गया कि उन्हें कभी भी खून की प्यास नहीं रखनी चाहिए। हत्यारों को फांसी देना उनके लिए कभी भी अच्छा नहीं रहा। हाल के समय में जेलों के नाम को प्रिजन से सुधार गृह में बदला गया है। यह समाज की बदला लेने की मूल खूनी प्रवृत्ति से हटकर अधिक सभ्य नीति के बदलाव को दर्शाता है।' यह भी पढ़ें- गड़बड़ी से हुई BJP की ऐतिहासिक जीत, केंद्रीय मंत्री की सीट पर विपक्ष के...
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