नई दिल्ली, मई 12 -- संजय पारिख,वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ी याचिकाओं को सुनने के क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि काश, जजों की नियुक्ति भी चुनाव आयुक्तों वाली तेजी से होती। बेशक, यह तंज में की गई टिप्पणी प्रतीत होती है, लेकिन इसके गहरे निहितार्थ हैं। सर्वोच्च न्यायालय से लेकर निचली अदालतों तक न्यायाधीशों के खाली पद आज की सच्चाई है। इसी पखवाड़े सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाकर 38 जरूर कर दी गई, लेकिन न्यायिक नियुक्ति मौजूदा समय का एक बड़ा मसला है। राज्यसभा में सरकार ने खुद माना है कि 1 दिसंबर, 2025 तक देश की निचली अदालतों में जजों के 4,855 पद रिक्त थे, जिनमें उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 1,055 रिक्तियां थीं, जबकि गुजरात 535 रिक्तियों के साथ दूसरे स्थान पर थ...