जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई:तीन विग्रहों के रूप में सुदर्शन चक्र के साथ नीलाद्रि पर्वत पर बसे जगन्नाथ
केशव गोस्वामी महाराज, जुलाई 14 -- रथ यात्रा की यह प्रथा सत्ययुग से चली आ रही है। रथ यात्रा का प्रसंग स्कंद पुराण, पद्म पुराण, पुरुषोत्तम-माहात्म्य में वर्णित हुआ है। इस रथ यात्रा का उद्देश्य यह है कि वे लोग, जो संपूर्ण वर्ष भर में मंदिर में प्रवेश नहीं पा सकते हैं, उन्हें भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो। यह तो रथ यात्रा का बाह्य कारण है, किंतु इसके गूढ़ रहस्य को श्रीचैतन्य महाप्रभु ने प्रकटित किया है। श्रीजगन्नाथ मंदिर द्वारका अथवा कुरुक्षेत्र सदृश है और गुंडिचा मंदिर वृंदावन का प्रतीक है।इस विग्रह रूप में दर्शन चैतन्य महाप्रभु ने श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा को भजन-कीर्तन तथा नृत्य से जोड़कर और भी रसमय बना दिया। जगन्नाथ पुरी ही नहीं, दुनिया में अनेक जगह भगवान की रथ यात्रा निकलती है। चैतन्य महाप्रभु की परंपरा में संत हुए केशव गोस्वामी ने बत...
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