सहरसा, मार्च 19 -- सिमरी बख्तियारपुर, निज संवाददाता। नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत रानी बाग जामा मस्जिद के इमाम हाफिज मुमताज रहमानी ने कहा कि अल्लाह रब्बुल इज्जत ने माहे रमजान में मुकद्दस कुरान को नाजिल कर मुसलमानों को जिंदगी जीने का तरीका बताया। किन कामों को करना चाहिए एवं किन कामों से बचना चाहिए कुरान की आयतें करीमा बयां कर रही हैं। इस्लाम धर्म में जकात (दान)और ईद पर दिया जाने वाला फितरा का खास महत्व है। माहे रमजान में इनको अदा करने का महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम के पवित्र ग्रंथ कुरान के मुताबिक हर एक समर्पित मुसलमान को साल में अपनी आमदनी का 2.5 प्रतिशत हिस्सा ग़रीबों को दान में देना चाहिए। इस दान को ज़कात कहते हैं। यह केवल मिस्कीनों, ऐसे मुसाफिरों को जिनके पास कुछ नहीं बचा उसी को देना चाहिए। जकात का मकसद जरूरतमंदों को माली...
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