कानपुर, मार्च 26 -- हजारों किलोमीटर दूर चल रही जंग ने दादानगर के छोटे उद्यमी भूरेलाल के सपनों को चकनाचूर कर दिया। प्लास्टिक साइकिल पैडल बनाने के 16 साल पुराने कारोबार को बर्बाद कर दिया। कच्चे माल की अचानक कमी और कीमतों में भारी उछाल ने उत्पादन लागत को इतना बढ़ा दिया कि कारखाना चलाना मुश्किल हो गया। सिर्फ भूरेलाल ही नहीं बल्कि इनके कारखाने में काम करने वाले दो दर्जन श्रमिकों के सामने भी बेरोजगारी का संकट खड़ा है। भूरे लाल बताते हैं कि प्लास्टिक दाना इतना महंगा हो गया कि उनके लिए यह खरीदना संभव नहीं था। ऐसे में तैयार माल की कीमत बढ़ाने पर ग्राहक पीछे हट गए और ऑर्डर मिलना लगभग बंद हो गया। धीरे-धीरे हालात ऐसे बने कि मशीनें थम गईं और कारखाने का शटर गिराना पड़ा। कारखाने में काम करने वाले मजदूरों पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। रोजगार छिनने से कई प...