नई दिल्ली, अप्रैल 18 -- हर जंग अपने पीछे गहरे जख्म और चुभते सवालों की लंबी शृंखला छोड़ जाती है। ईरान पर थोपा गया युद्ध इसका अपवाद नहीं है। कल जब इतिहास की पोथियों से उफन रही हार-जीत की गाथाएं राष्ट्रवाद की नई बिसातें बिछा रही होंगी, तब कहीं दुबका एक सवाल उन्हें मुंह चिढ़ाता नजर आएगा। यह जंग क्यों छेड़ी गई थी? अपनी बात स्पष्ट करने के लिए आपको सन् 1982 में ले चलता हूं। इंग्लैंड में मार्गरेट थैचर राज कर रही थीं। प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालते ही उन्होंने सरकारी कंपनियों के निजीकरण, श्रमिक संगठनों पर अंकुश, सरकारी खर्चों में कटौती और मुक्त बाजार को बढ़ावा देना शुरू कर दिया था। इससे तात्कालिक तौर पर बेरोजगारी और सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। नतीजतन, हर रायशुमारी में वह लोकप्रियता की सीढ़ियां लुढ़कती नजर आतीं। लगता था कि वह अगला चुनाव हार जाए...