प्रमुख संवाददाता, अप्रैल 3 -- झाग से भरे टब और मशीनों की गूंज से गुलजार रहने वाली डिटर्जेंट फैक्ट्रियां खामोश हैं। कई इकाइयों में कच्चा माल नहीं है और जहां है, वहां उसकी कीमत ने कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। करीब 90 फीसदी इकाइयों में काम ठप है या बेहद सीमित स्तर पर सिमट गया है। कभी स्थिर व भरोसेमंद मानी जाने वाली यह इंडस्ट्री अब अस्तित्व बचाने की जंग लड़ रही है। कानपुर और कानपुर देहात में फैली 500 से अधिक डिटर्जेंट इकाइयों पर संकट गहराता जा रहा है। उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने उत्पादन व्यवस्था को तगड़ा झटका दिया है। ईरान-अमेरिका के बीच संघर्ष के कारण क्रूड ऑयल की कमी ने उद्यमियों को पीछे धकेल दिया है। पॉलिमर की कीमत महीनेभर में 68 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 93 रुपये तक पहुंच गई है, वहीं सोडा भी ...
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