बागपत, मई 17 -- बड़ौत। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब खेती-किसानी पर साफ दिखाई देना शुरू हो जाएगा। इससे फसलों की उत्पादन लागत बढ़ेगी। सबसे ज्यादा असर आलू उत्पादक किसानों पर पड़ेगा, क्योंकि आलू की खेती के लिए वर्षभर में 15 से अधिक बार खेत की जुताई करनी पड़ती है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं। डीजल अब 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया है। आलू की खेती में खुदाई के बाद मार्च से जून तक नियमित जुताई की जाती है। ढैंचा की बुआई, हेरो, कल्टीवेटर, रोटावेटर और बखर से कई चरणों में खेत तैयार किया जाता है। यह भी पढ़ें- मूल्य-वृद्धि से बढ़ने लगीं मुश्किलें जिन किसानों के पास अपना ट्रैक्टर नहीं है, वे किराये पर जुताई कराते हैं। वर्तमान में एक बीघा पक्के की हेरो से जुताई 400 रुपये, कल्टीवेटर से 300 रुपये, रोटावेटर...