लखीमपुरखीरी, मार्च 16 -- छोटी काशी गोला में चैत्र कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि को भगवान गोकर्णेश्वर शिव के मनुष्यों के समक्ष प्राकट्य की तिथि मानी जाती है। मान्यता है कि शिव के वरदान के अनुसार इस दिन किया गया पूजन मनोवांछित फल प्रदान करता है। इसी कारण इस तिथि को गोकर्णेश्वर शिव प्राकट्य महापर्व के रूप में मनाया जाता है। गोला गोकर्णनाथ पर शोध प्रबंध लिखने वाले साहित्यकार लोकेश कुमार गुप्त के अनुसार पद्म पुराण में छोटी काशी गोला का वर्णन मिलता है। इसी मान्यता के चलते प्राचीन काल से ही श्रद्धालु यहां पंचकोशी परिक्रमा कर पंच तीर्थों में स्नान और रात्रि जागरण कर गोकर्णेश्वर शिव का पूजन करते आ रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए राजा-महाराजाओं के समय से यहां चैती मेला लगना शुरू हुआ, जो आज भी परंपरा के रूप में जारी है।

हिंदी हिन्दुस्तान...