देहरादून, जून 25 -- देहरादून। सफेद दाग (विटिलिगो) को लेकर समाज में आज भी कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। लोग इसे छूने से फैलने वाली बीमारी या कुष्ठ रोग समझ बैठते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह न तो संक्रामक है और न ही छूने से फैलता है। समय पर पहचान और उचित उपचार से इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विश्व विटिलिगो दिवस के अवसर पर चर्म रोग विशेषज्ञों ने लोगों से जागरूक होने और मरीजों के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार न करने की अपील की। विशेषज्ञों के अनुसार विटिलिगो त्वचा से जुड़ी एक ऑटो इम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली त्वचा को रंग देने वाली मेलानोसाइट कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है। इसके कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों पर सफेद चकत्ते दिखाई देने लगते हैं। यह भी पढ़ें- 10 साल में दोगुने हुए सफेद दाग के मरी...