आगरा, जुलाई 6 -- चातुर्मास एवं मंगल प्रवास के लिए आचार्य निर्भय सागर महाराज को श्रीफल भेंट किया गया। इसके बाद आचार्य निर्भय सागर महाराज ने वैदिक एवं जैन परंपरा के मंत्रोच्चार के मध्य निर्यापक मुनि शिवदत्त सागर महाराज के मस्तक पर साथिया अंकित कर उन्हें उपाध्याय पद के संस्कारों से विभूषित किया। उपाध्याय पद प्राप्त करते ही पूरा पंडाल जय-जय उपाध्याय श्री के उद्घोष से गूंज उठा व श्रद्धालुओं ने खड़े होकर भावभीनी वंदना की जैनेश्वरी मुनि दीक्षा ग्रहण की। आचार्य निर्भय सागर महाराज ने अपने करकमलों से उनका केशलोंच कर मुनि दीक्षा के संस्कार प्रदान किए और मुनिश्री वासुदत्त सागर महाराज नाम से विभूषित किया। दीक्षा के उपरांत उनके परिजनों ने नवीन कमंडल एवं पिच्छी भेंट कर भावभीनी विदाई दी। इस दृश्य ने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। इस पावन ...