रायपुर, मई 7 -- छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए संरक्षित बैगा जनजाति के 13 बच्चों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया। पुलिस ने बताया कि बुधवार को चलाए गए इस बचाव अभियान के दौरान आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें दो कथित मानव तस्कर और छह मालिक शामिल हैं। इस दौरान पुलिस ने 8 से 15 साल की उम्र के बच्चों को उनके चंगुल से मुक्त कराया। प्राप्त जानकारी के अनुसार इन बच्चों से सुबह 6 से 9 बजे तक और फिर दोपहर 12 से शाम 7 बजे तक कड़ी मेहनत कराई जाती थी। बदले में बच्चों को कोई वेतन नहीं मिलता था, जबकि उनके माता-पिता को केवल 1 हजार से 2 हजार रुपए महीना दिए जाते थे। बैगा जनजाति मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और इससे लगे मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में निवास करने वाली एक अत्यंत पिछड़ी (PVTG) आदिम जनजाति समूह है। यह भी प...