उन्नाव, फरवरी 13 -- फतेहपुर चौरासी। नारीगाड़ा, तकिया निगोही में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रविवार को श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का की कथा सुनाई गई। कथावाचक नीरज स्वरूप ने रास पंच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव सागर से पार हो जाता है, उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उद्धव-गोपी संवाद, उद्धव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान व्यास ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपिय...
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