नई दिल्ली, दिसम्बर 15 -- हिंदू शास्त्रों में कर्मों के अनुसार, फल मिलने की बात कही गई है। अच्छे कर्मों से स्वर्ग और बुरे कर्मों से नरक की यातनाएं भोगनी पड़ती हैं। चोरी और हिंसा जैसे पापों को बहुत गंभीर माना गया है, क्योंकि ये दूसरों का हक छीनते हैं और जीवों को कष्ट देते हैं। वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद जी महाराज अपने सत्संगों में गरुड़ पुराण और अन्य शास्त्रों के आधार पर नरक की यातनाओं का वर्णन करते हैं। महाराज जी कहते हैं कि नरक कोई कल्पना नहीं, बल्कि कर्मों का फल है। चोरी और हिंसा करने वालों को यमलोक में भयंकर सजाएं मिलती हैं। आइए महाराज जी की शिक्षाओं से जानते हैं।चोरी करने वालों को नरक में क्या यातना मिलती है? प्रेमानंद जी महाराज गरुड़ पुराण का हवाला देते हुए बताते हैं कि चोरी करने वाला व्यक्ति नरक में तामिस्र और अंधतामि...