बेगुसराय, मार्च 18 -- गढ़पुरा, एक संवाददाता। चैत्र नवरात्रि न केवल हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का आरंभ है, बल्कि यह प्रकृति और शक्ति के मिलन का उत्सव भी है। इस वर्ष ग्रहों की स्थिति और विशेष नक्षत्रों का मेल भक्तों के लिए विशेष फलदायी रहने वाला है। गुरूवार को नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है, जिसमें समस्त देवी-देवताओं का वास होता है। कोरैय निवासी पंडित नवल किशोर झा ने बताया की 19 मार्च गुरुवार की सुबह 06: 21 से 07:45 बजे तक अमृत चौघड़िया और ब्रह्म मुहूर्त का प्रभाव रहेगा, जिसमें कलश की स्थापना शुभ है, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 09 :11 से 09:56 बजे तक रहेगा। ऐसे में यदि सुबह जल्दी कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो अभिजीत मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ और दोषमुक्त माना जाता है। ह...