सहरसा, मार्च 22 -- सहरसा, नगर संवाददाता। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन शनिवार को श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा-अर्चना की। "पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता, प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता"मंत्र का जप भक्तों ने किया। मां चंद्रघंटा का स्वरूप युद्ध मुद्रा में होता है और इनकी उपासना से मणिपुर चक्र जागृत होता है। माना जाता है कि इनकी पूजा से वीरता के साथ-साथ सौम्यता और विनम्रता का भी विकास होता है। मां चंद्रघंटा का संबंध मंगल ग्रह से माना गया है। देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है, इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका वाहन सिंह है। मां की दस भुजाएं और तीन नेत्र हैं। आठ हाथों में खड्ग, बाण सहित विभिन्न अस्त्र- शस्त्र रहते हैं, जबकि दो हाथों से वे भक्तों को आ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.