मेरठ, मार्च 21 -- कैलाश पर्वत रचना के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 42वें दिन सर्वप्रथम भगवान आदिनाथ की नित्य नियम पूजन के साथ स्वर्ण कलश से अभिषेक व शांतिधारा की गई। शनिवार को विधान में दूर दराज से आए 151 परिवारों ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। भगवान की शांतिधारा आशीष जैन, रिषित जैन व स्वर्ण कलश से अभिषेक मयंक जैन, अर्पित जैन ने किया। आरती का दीप प्रज्वलन सोनल जैन ने किया। विधान में मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि लोभ सब पापों की जड़ है जो धर्म लोभ की नींव पर खड़ा होता है वह क्षण भंगुर होता है। लोभ तृष्णा से ही जन्म लेता है लाभ बढ़ने पर लोभ भी बढ़ता है लोभ की पूर्ति 100 जन्मों में भी नहीं हो सकती। इसलिए चेहरा नहीं चरित्र अच्छा होना चाहिए। सांयकाल में भगवान आदिनाथ की आरती की गई। रात्रि में गुरुकुल के छात्रो...