सिमडेगा, अप्रैल 13 -- सिमडेगा। साल 2016-17 का वह दौर याद कीजिए, जब शौचालय निर्माण के लिए पुरुष मिस्त्रियों की किल्लत हो गई थी। तब सिमडेगा की महिलाओं ने हाथों में करनी थामा और रानी मिस्त्री बनकर स्वच्छता का ऐसा डंका बजाया कि खुद पीएम नरेंद्र मोदी भी उनके कायल हो गए थे। आज ठीक 8-9 साल बाद उन्हीं जांबाज महिलाओं ने एक और क्रांति कर दी है। फर्क सिर्फ इतना है कि तब संकल्प स्वच्छता का था और आज जिम्मा मांदर और नगाड़े को बचाने का है। डीसी कंचन सिंह की एक जादुई सोच ने बानो प्रखंड के रायकेरा गांव के हर घर को पिछले डेढ़ महीना तक एक छोटे कारखाने में तब्दील कर दिया। यह भी पढ़ें- स्वयं सहायता समूहों से आजीविका अर्जित करने के उपाय जानें मकसद था जिले के सांस्कृतिक केंद्रों को फिर से मांदर और नगाड़े की थाप से गुंजायमान करने का। इस मिशन की कमान गांव की उन म...
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