नई दिल्ली, दिसम्बर 11 -- चुनाव सुधार पर सड़क से संसद तक चर्चा तेज है और यह जरूरी भी है। यह सुखद है कि देश के 12 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण तेज गति से हो रहा है, पर यह भी देखने वाली बात है कि उतनी ही तेज रफ्तार से इस पर सियासत भी चल रही है। पुनरीक्षण का जो काम राजनीतिक दलों को परस्पर समन्वय से करना चाहिए, उसके लिए न केवल चुनाव आयोग को दोषी ठहराया जा रहा है, बल्कि न्यायालय का भी बहुमूल्य समय बर्बाद किया जा रहा है। वैसे, राज्यों में बीते सप्ताह ही पुनरीक्षण का काम आधा से ज्यादा पूरा हो चुका है। संभव है, चुनाव आयोग पुनरीक्षण के लिए और भी समय दे, तो फिर राजनीति में समय गंवाने के बजाय राजनीतिक दलों को जमीनी स्तर पर ज्यादा सजगता दिखानी चाहिए। एक भी वैध मतदाता सूची से छूटने न पाए और एक भी अवैध मतदाता सूची म...