नई दिल्ली, अगस्त 5 -- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उद्धव ठाकरे गुट की याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू की। शीर्ष अदालत ने कहा कि राजनीतिक पार्टी का अपने विधायी विंग (विधायकों के समूह) पर नियंत्रण बना रहता है और उसके वैध फैसले ही मान्य होने चाहिए। शिवसेना (ठाकरे गुट) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपनी दलील में कहा कि चुनाव आयोग ने पार्टी के संविधान को नजरअंदाज किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ हालांकि यह भी कहा कि अगर चुने हुए प्रतिनिधियों का बहुमत राजनीतिक पार्टी के निर्देशों से 'वास्तव में असहमत' है, तो उन्हें राजनीतिक फैसले लेने के लिए कुछ 'गुंजाइश' दी जानी चाहिए। यह भी पढ़ें- बार की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकते : सुप्रीम कोर्ट ठाकरे गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता...