अलीगढ़, जनवरी 8 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। भीषण शीतलहर के साथ ही गुरुवार से चिल्ला जाड़े की औपचारिक शुरुआत हो रही है। वर्ष के सबसे ठंडे माने जाने वाले ये 14 दिन (आठ से 21 जनवरी) न केवल मौसम बल्कि शरीर की भी कड़ी परीक्षा लेंगे। आयुर्वेद के अनुसार यह समय शरीर की अग्नि, बल और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के संतुलन का होता है। मौसम विभाग ने भी तापमान में और गिरावट की चेतावनी जारी की है। चिल्ला जाड़े को शीत ऋतु का चरम काल माना जाता है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार इन 14 दिनों में शरीर के अंदर विशेष परिवर्तन होते हैं। ठंड के प्रभाव से जठराग्नि तीव्र हो जाती है, जिससे पाचन शक्ति तो बढ़ती है लेकिन यदि आहार-विहार में लापरवाही बरती गई तो वात दोष का प्रकोप तेजी से बढ़ सकता है। इसका असर जोड़ों, नसों और त्वचा पर साफ दिखाई देता है। त्वचा अधिक शुष्क हो जाती है, ...