भागलपुर, अक्टूबर 10 -- भागलपुर, वरीय संवाददाता। स्वास्थ्य विभाग के हालिया आंकड़े बताते हैं कि देश में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी इंटरनेट सर्च में तकरीबन 41 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। किशोरों, कामकाजी वर्ग व युवा वर्ग में अवसाद, चिंता व नींद की समस्याएं अधिक देखी जा रही हैं। डिप्रेशन को नजरअंदाज किए जाने से ओसीडी (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) का शिकार युवा एवं किशोर व कामकाजी वर्ग हो रहा है। परिणामस्वरूप इस वर्ग के लोगों में आत्महत्या किए जाने की घटना भी बीते आधे दशक में तेजी से बढ़ी है। चिकित्सकों की माने तो तनाव, डिप्रेशन को समझकर उसका इलाज या काउंसिलिंग जरूरी है। अगर किसी को किसी प्रकार की चिंता, तनाव या डिप्रेशन है तो उसे छिपाने की जरूरत नहीं है। अपनों से बात करें और बेझिझक होकर मनोरोग चिकित्सक से मिलकर काउंसिलिंग या फिर इलाज कराएं। जे...
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