समस्तीपुर, जून 19 -- । बूढ़ी गंडक नदी में हर साल बढ़ रहा गाद(बालू का ढ़ेर) टापू का रूप लेता जा रहा है। यह नदी की गहराई को कम कर रहा है। जो जलस्तर की बढ़ोतरी पर तटबंधो पर दबाब बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। यह हालात पूसा-सैदपुर पुल के निकट समेत अन्य दर्जनों स्थल पर है। जिसे निकालने की जरूरत है। जानकारो की मानें तो नदी से गाद निकल जाने से नदी की गहराई बढ़ जायेगी। जिससे जलस्तर का भंडारण अधिक हो सकेगा। लोगों की मानें तो अब भी कई स्थलों से चोरी-छिपे तरीके से बालू कारोबारी नदी से मोटा बालू नाव के सहारे निकाल कर बेचते हैं। तो दूसरी ओर नदी किनारे मिट्टी मिश्रित बालू को लेकर टेलर के सहारे बेच रहे हैं। अधिकतर लोग इसे घर या सड़क निर्माण में उपयोग में ला रहे हैं। जिसके प्रत्येक टेलर मिट्टी की कीमत 7-8 सौ रूप्ये या उससे अधिक होती है। यह दूरी पर रेट तय किया...
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