बिहारशरीफ, जून 23 -- चिंता : आद्र्रा और हस्त दोनों नक्षत्रों ने किसानों को किया निराश आते आद्र्रा न दिए, जाते दिए न हस्त तो किसान और मेहमान दोनों होते हैं परेशान लोक परंपरा में आद्र्रा और हस्त नक्षत्र की वर्षा को माना गया है कृषि की खुशहाली का आधार आद्र्रा और हस्त नक्षत्र की बारिश फसल के लिए है संजीवनी पावापुरी, निज संवाददाता। भारतीय कृषि संस्कृति में मौसम और खेती से जुड़ी लोक उक्तियों का विशेष महत्व रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बुजुर्गों द्वारा कही जाने वाली एक प्रचलित उक्ति है आते आद्र्रा न दिए, जाते दिए न हस्त, ऐसे में खुश कैसे रहे पहुना और गृहस्थ। यह कहावत केवल मौसम का संकेत नहीं, बल्कि किसानों के जीवन और कृषि व्यवस्था से जुड़े लंबे अनुभवों का सार भी है। आद्र्रा और हस्त दोनों नक्षत्रों ने किसानों को निराश किया है। लोक परंपरा में ...