समस्तीपुर, अप्रैल 19 -- केशव कुमार। जिले में लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन से खेती पर संकट गहरा गया है। कभी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि, तो कभी सूखा और बाढ़ से फसलें बर्बाद हो रही हैं। आलम यह है कि अब खेती पूरी तरह मौसम के भरोसे नहीं रह गई है। बल्कि जोखिम भरा काम बन चुकी है। पिछले पांच वर्षों से मौसम चक्र में लगातार उलटफेर देखा जा रहा है। जिले में ठंड अब देर से शुरू हो रही है। मार्च-अप्रैल की गर्मी मई-जून तक खिंच रही है। मानसून की बारिश भी अंतिम महीनों तक खिसक गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार स्थानीय और वैश्विक स्तर पर जलवायु में आए बदलावों का असर गंगा के मैदानी इलाकों में साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। यह भी पढ़ें- जलवायु परिवर्तन से फसलों को 20 से 30 फीसदी का हो रहा नुकसान दिसंबर का पहला सप्ताह, जिसे पहले कड़ाके की ठंड की शुरुआत माना ज...