मिर्जापुर, मई 8 -- जिगना,हिन्दुस्तान संवाद। क्षेत्र के परमानपुर गांव में गंगा तट पर चल रही संगीतमय भागवत कथा के चौथे दिन व्यास पं. विष्णुधर द्विवेदी ने बताया कि भगवान राम का प्राकट्य खीर से हुआ था। उन्होंने बताया कि चावल, दूध और चीनी को अग्नि पर पकाकर खीर बनती है। इसमें चावल परिश्रम का प्रतीक है, दूध विशुद्ध ज्ञान का, चीनी प्रेम का और अग्नि तप का प्रतीक है। प्रभु की प्राप्ति के लिए परिश्रम, ज्ञान, प्रेम और तप की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि न तो शूर्पणखा को राम मिले और न ही रावण को सीता मिली। रामकथा पूरी दुनिया को मर्यादा में रहकर जीवन जीने की कला सिखाती है। रामचरितमानस भारतीय जनमानस की जीवनरेखा है। भगवान राम ने रावण का वध 14 वर्षों में किया, लेकिन रावण द्वारा फैलाई गई कुरीतियों को समाप्त करने में 11 हजार वर्ष लग गए। जब प्रत्येक व्यक...