मऊ, सितम्बर 2 -- मऊ, संवाददाता। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार जन्माष्टमी पर एक बेहद दुर्लभ और परम शुभ संयोग बन रहा है। आचार्य श्याम जी पांडेय के अनुसार चार सितंबर को भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र एक साथ उपस्थित रहेंगे। हर वर्ष यह संयोग नहीं बनता, इसलिए इस बार की जन्माष्टमी व्रत एवं पूजन के लिहाज से अत्यंत फलदायी मानी जा रही है। आचार्य ने बताया कि परंपरा के अनुसार जन्मोत्सव का उत्साह दो दिन (सप्तमी और अष्टमी) रहता है, लेकिन मुख्य व्रत एवं पूजन अष्टमी तिथि के आधार पर ही तय होता है। यह भी पढ़ें- Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल का करें इन 5 स्टेप में करें शृंगार, दिखेंगे बहुत खूबसूरत जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक...