अल्मोड़ा। कमल पंत, नवम्बर 14 -- उत्तराखंड के चारधाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में क्षमता से अधिक श्रद्धालु हिमालय की पारिस्थितिकी और पर्यावरण के लिए खतरा बन सकते हैं। वैज्ञानिकों ने 23 साल के आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर पहली बार इन धामों की वहन क्षमता (कैयरिंग कैपैसिटी) तय की है। रिपोर्ट में हिमालय पर स्थित आस्था स्थलों के संवेदनशील पर्यावरण के प्रति आगाह किया गया है। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान, अल्मोड़ा और उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विवि के वानिकी महाविद्यालय, भरसार की यह संयुक्त शोध रिपोर्ट हाल में नेचर पोर्टफोलियो के जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुई है। इसमें वर्ष 2000 से 2023 तक के डेटा का अध्ययन कर चारधामों की प्रतिदिन की वहन क्षमता निकाली गई है। इसमें चारों तीर्थस्थलों के...
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