प्रयागराज, जून 29 -- प्रयागराज। शादी-ब्याह, गृह प्रवेश व मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों का शुभ मुहूर्त 15 जुलाई के बाद नहीं मिलेगा। फिर 25 जुलाई को भगवान विष्णु के हरिशयनी एकादशी के दिन योग निद्रा में जाने पर चातुर्मास का प्रारंभ हो जाएगा। साथ ही आध्यात्मिक साधना, तप व आत्मशुद्धि का पवित्र समय शुरू हो जाएगा। उत्थान ज्योतिष एवं आध्यात्म संस्थान के निदेशक पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जुलाई को सुबह 11.08 बजे देवगुरु बृहस्पति वृद्धत्व दोष में आ जाएंगे और 15 जुलाई को अस्त हो जाएंगे। देवशयनी एकादशी से देवोत्थानी एकादशी तक यानि चातुर्मास की अवधि में भगवान शयन काल में होंगे, इसलिए मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। यह भी पढ़ें- Chaturmas: कब से लग रहे हैं चतुर्मास, मांगलिक कार्यों पर कब लग जाए...