नई दिल्ली, जनवरी 26 -- चाणक्य नीति में एक बहुत प्रसिद्ध श्लोक है, जो दुश्मन से निपटने की सबसे व्यावहारिक और बुद्धिमान रणनीति बताता है:अनुलोमेन बलिनं प्रतिलोमेन दुर्जनम्।आत्मतुल्यबलं शत्रु: विनयेन बलेन वा।। इसका अर्थ है -बलवान दुश्मन से सीधे (अनुलोम) टकराव न करें, बल्कि चालाकी और रणनीति से काम लें।दुर्जन या छोटे-मोटे चालबाज दुश्मन से उल्टा (प्रतिलोम) व्यवहार करें, यानी उसकी चालाकी से भी ज्यादा चालाकी दिखाएं। -जो दुश्मन आपकी बराबरी का हो, उसे पहले विनम्रता (विनय) से समझाएं, यदि न माने तो बल प्रयोग करें। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दुश्मन एक जैसा नहीं होता है। उसकी ताकत, स्वभाव और स्थिति के अनुसार ही रणनीति बदलनी चाहिए। आज के समय में भी यह श्लोक बहुत प्रासंगिक है। चाहे कार्यक्षेत्र में बॉस-कॉलेज, पड़ोस में झगड़ा, या जीवन में कोई परेशान करने वा...
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