नई दिल्ली, जनवरी 16 -- आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि सफलता का सबसे बड़ा शत्रु डर है। डर व्यक्ति को छोटा रखता है, अवसरों से दूर करता है और सपनों को दबा देता है। चाणक्य कहते हैं - 'जो डरता है, वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता है।' सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो डर को त्याग देते हैं। चाणक्य नीति में चार ऐसे डर बताए गए हैं जो व्यक्ति को हमेशा पीछे रखते हैं - सच बोलने का डर, मेहनत से डरना, बदलाव से डरना और संघर्ष से डरना। इन चार डरों को मन में रखने वाला कभी भी बड़ा मुकाम नहीं हासिल कर सकता है। आइए इन चार डरों को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि इन्हें कैसे त्यागें।सच बोलने का डर - सबसे बड़ा बंधन आचार्य चाणक्य कहते हैं कि सच बोलने से डरने वाला कभी सम्मान नहीं पाता है। आज के समय में लोग सच बोलने से डरते हैं, क...
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