नई दिल्ली, जनवरी 9 -- आचार्य चाणक्य अपनी नीतियों में जीवन के हर पहलू पर व्यावहारिक सलाह देते हैं। वे कहते हैं कि बुढ़ापा स्वाभाविक है, लेकिन कुछ गलत आदतें इसे समय से पहले खराब कर देती हैं। स्वास्थ्य, सम्मान और सुख का नाश हो जाता है। चाणक्य नीति सिखाती है कि युवावस्था में ही इन आदतों को छोड़ दें तो बुढ़ापा सुखमय और सम्मानजनक रहेगा। ये आदतें शरीर को कमजोर करती हैं, मन को अशांत बनाती हैं और जीवन के अंतिम वर्षों को कष्टदायी बना देती हैं। आचार्य चाणक्य की चेतावनी है कि इन 5 गलत आदतों को तुरंत त्यागें, वरना बुढ़ापा दुखदायी हो जाएगा। आइए जानते हैं ये 5 आदतें।अत्यधिक भोजन और असंयम - शरीर का शत्रु आचार्य चाणक्य कहते हैं कि 'अति सर्वत्र वर्जयेत्।' अत्यधिक भोजन और असंयम बुढ़ापे का सबसे बड़ा शत्रु है। ज्यादा खाने से पाचन कमजोर होता है, मोटापा बढ़ता ह...