नई दिल्ली, जुलाई 10 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को संपत्ति विवाद के एक मामले में सुनवाई करते हुए एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी शख्स अपनी भतीजी के पति को 'घरदामाद' मानकर संपत्ति का अधिकार नहीं दे सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि समाज में ऐसी कोई प्रथा है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने झारखंड के उरांव आदिवासी समुदाय से जुड़े एक संपत्ति विवाद में यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत और झारखंड हाईकोर्ट के फैसलों को भी पलट दिया। निचली अदालतों ने बिना किसी पुख्ता सबूत के संपत्ति पर अधिकार के दावे को स्वीकार कर लिया था। यह भी पढ़ें- परिवार को धर्म बदलने के लिए मजबूर करने वाला आरोपी SC पहुंचा, कोर्ट ने दे दी राहतक्या है पूरा मामला? विवाद झारखंड के एक उरांव आदिव...