नई दिल्ली, सितम्बर 20 -- चांद को देखकर अक्सर लगता है कि वह सबका है। लेकिन जब कोई बड़ा देश यह कहता है कि चांद हमारा है, तो सवाल उठता है कि क्या वाकई कोई देश उस पर मालिकाना हक जता सकता है? क्या वहां झंडा गाड़ना काफी है? क्या वहां से पानी, बर्फ या खनिज निकालना जायज है? और अगर निकाला जाए, तो वह सामान किसका होगा? ये सवाल अब सिर्फ वैज्ञानिक चर्चा नहीं रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान के बाद ये कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बन गए हैं। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है.ट्रंप का दावा और उसके बाद का सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि चांद हमारा है। पोस्ट के साथ चांद की सतह की एक तस्वीर भी थी, जिसमें अमेरिकी झंडा दिखाया गया था। इसके अलावा अम...