नई दिल्ली, फरवरी 19 -- क्या आपने कभी गौर किया है कि जैसे ही बस या ट्रेन अपनी रफ्तार पकड़ती है, आपकी पलकें खुद-ब-खुद भारी होने लगती हैं? भले ही आप पूरी नींद लेकर घर से निकले हों, लेकिन सफर शुरू होते ही आंखों का नींद से भर जाना कोई इत्तेफाक नहीं है। कुछ लोग इसे 'ट्रैवलिंग फटीग' यानी सफर की थकान मानते हैं, तो कुछ इसे ताजी हवा का असर समझते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं असलियत में इसके पीछे आपके दिमाग की दिलचस्प इंजीनियरिंग और शरीर का कुदरती रिस्पॉन्स छिपा हुआ रहता है। आइए जानते हैं आखिर क्यों चलती गाड़ी की हल्की थरथराहट हमें किसी लोरी जैसी लगती है और क्यों हमारा दिमाग सफर के दौरान 'स्लीप मोड' में चला जाता है? इस खबर में सफर की थकान और सुकून के पीछे के असली विज्ञान को करीब से समझने के लिए हमने बात की शारदाकेयर-हेल्थसिटी के आंतरिक चिकित्सक डॉ. च...
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