हल्द्वानी, अक्टूबर 3 -- पूनम मौर्य हल्द्वानी। महात्मा गांधी के लिए खादी सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि स्वावलंबन और स्वदेशी का प्रतीक थी। वक्त बदला, पहनावे का अंदाज बदला और बाजार में कपड़ों के विकल्प बढ़े, लेकिन खादी का चलन खत्म नहीं हुआ। गांधी जयंती के मौके पर आज भी खादी भंडारों में इसकी मांग है। खास बात यह है कि अब खादी सिर्फ बुजुर्गों की पसंद तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा भी कुर्ते, शर्ट और जैकेट के रूप में इसे अपने पहनावे का हिस्सा बना रहे हैं。 यह भी पढ़ें- Moradabad News: तोहफा : गांधी आश्रमों में खादी के कपड़ों पर 25 फीसदी की छूट घोषितखादी की बिक्री में वृद्धि सदर बजार स्थित गांधी आश्रम के संचालक अभय कुमार वर्मा के अनुसार पिछले चार वर्षों में खादी के कपड़ों की मांग लगातार बढ़ी है। वर्ष 2023 में जहां सालाना बिक्री 9.97 लाख रुपये थी, वहीं 202...