चतरा में घास-फूस की झोपड़ी में पढ़ाई करने को विवश हैं बिरहोर बच्चे
चतरा, अगस्त 24 -- चतरा संवाददाता झारखंड राज्य का निर्माण इस उम्मीद के साथ हुआ था कि यहां के आदिवासी परिवारों का उद्धार होगा। राज्य बने 25 साल हो चुके हैं। सरकार 'स्मार्ट क्लास' और शिक्षा व्यवस्था सुधारने के नाम पर करोड़ों खर्च करने के बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन इन दावों की पोल खोलती एक ऐसी शर्मनाक तस्वीर चतरा जिले के हंटरगंज से सामने आई है, जो पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख देगी। यहां बिरहोर समुदाय के बच्चे पक्के भवन के बजाय झोपड़ी में पढ़ने और जानवरों वाला गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।
विद्यालय की स्थिति जिले के हंटरगंज प्रखंड स्थित जोलडीहा पंचायत के अम्बर गांव के प्राथमिक विद्यालय बिरहोर टोला किसी आलीशान बिल्डिंग में नहीं, बल्कि तंबू और घास-पतवार से बनी एक कच्ची झोपड़ी में चल रहा है। विद्यालय में 41 बच्चों का नामांकन है, जिनमें से रोज़ करीब 25...
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