परमहंस योगनंद, दिसम्बर 23 -- युद्ध और आतंकवाद के मुहाने पर खड़ी दुनिया के लिए जीसस की दी गई यह शिक्षा-'अपने शत्रु से भी प्रेम करो,' आज और भी अधिक प्रासंगिक है। क्रिसमस मनाने का यह सबसे बेहतर और उद्देश्यपूर्ण तरीका हो सकता है कि हम उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएं।क्रिसमस : 25 दिसंबर इस्ट इतिहास के ऐसे संकट काल में आए थे, जब संसार को आध्यात्मिक आशा और पुनरुत्थान की अत्यधिक आवश्यकता थी। उनका संदेश किसी संप्रदाय को बढ़ाने के विचार से नहीं था, जो उन पर अपना अधिकार जताए। उनका सार्वभौमिक संदेश एकता का था। उन्होंने मानव जाति को स्मरण कराया कि धर्मशास्त्रों में लिखा है, 'आप देवता हैं।' संत यूहन्ना ने क्राइस्ट की शिक्षाओं का प्रचार करते हुए यह भी कहा, 'जितने भी लोगों ने उसे प्राप्त किया, उन सब में ईश्वर का पुत्र बनने की शक्ति मौजूद है।' क्या ...