लखनऊ, अप्रैल 11 -- आनंद नगर, आलमबाग के रहने वाले चंद्रिका सिंह की उम्र लगभग 70 वर्ष हो गई है। उन्होंने अपना मकान बेटी के नाम कर दिया। फिर बेटी के नाम दाखिल-खारिज के लिए एक वर्ष पहले नगर निगम में आवेदन किया। चंद्रिका के मुताबिक नगर निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों ने दाखिल-खारिज के लिए घूस मांगा। उन्होंने पैसा नहीं दिया तो एक वर्ष से उनके मकान का दाखिल-खारिज उनकी बेटी सरस्वती के नाम नहीं हो पाया। शुक्रवार को नगर निगम मुख्यालय में लगे नागरिक समाधान दिवस में पहुंचे चंद्रिका सिंह ने कहा कि वह पिछले एक वर्ष में दर्जनों बार नगर निगम के जोन-5 कार्यालय गए। जोनल अधिकारी से लेकर उस बाबू तक से भी मिले, जिसके पास फाइल है, लेकिन दाखिल-खारिज नहीं किया गया। नागरिक समाधान दिवस में उन्होंने नगर आयुक्त गौरव कुमार तथा महापौर सुषमा खर्कवाल को अपनी पीड़ा सुना...