प्रयागराज, मई 16 -- एनसीजेडसीसी में आयोजित विमर्श कार्यक्रम की कड़ी में शनिवार को कथक केंद्र की निदेशक व नृत्यांगना उर्मिला शर्मा ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि कथक केवल नृत्य नहीं बल्कि हमारी संस्कृति की जीवंत कहानी है। कथक में जब घुंघरुओं की थाप पर इतिहास बोलने लगे और भावों में संस्कृति की आत्मा उतर आए, तब इस नृत्य का वास्तविक स्वरूप दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि कथक केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं है, बल्कि नारी सशक्तिकरण, पर्यावरण, गंगा अवतरण और सामाजिक सरोकारों जैसे विषयों पर भी प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। सूत्रधार हिमानी रावत के एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि कथक का उद्भव हंडिया के किचकिला गांव से माना जाता है, जो प्रयागराज के लिए गौरव का विषय है। कथक की परंपरा को संरक्षित रखने के उद्देश्य से 1993 में आचार्य पं....