मुजफ्फरपुर, नवम्बर 30 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। घर संभालती हैं, रोटियां बनाती हैं तब लड़कियां स्कूल जाती हैं। छात्राओं की कम उपस्थिति पर शिक्षकों ने जब सवाल किये तो अभिभावकों का यह दर्द उभरकर आया। माताओं का कहना था कि हम में से अधिकांश लोगों के घरों में काम करती हैं। पिता किसी की दुकान पर काम करते हैं या मजदूरी करते हैं। ऐसे में घर की बेटी बाकी भाई बहनों की देखभाल के साथ रोटी भी बनाती हैं। शिक्षकों के यह समझाने पर कि लड़कियों के लिए पढ़ाई कितनी जरूरी है, तब माताओं ने संकल्प लिया कि अब रोटी बनवाने की बजाए बेटियों को पढ़ाने पर ध्यान देंगी और नियमित स्कूल भेजेंगी। पहली बार जिले में तीन हजार स्कूलों में शनिवार को अभिभावक-शिक्षक बैठक हुई। एक साथ प्राइमरी-मिडिल ही नहीं, बल्कि इस बार हाईस्कूल में भी अभिभावक-शिक्षक बैठक हुई। इस बैठक में हा...
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