मेरठ, अप्रैल 27 -- गुरुकुलों में दीक्षा के अंतिम दिन गुरु अपने शिष्य को उपदेश देते थे। माता-पिता, आचार्य देव के समान हैं। आप पढ़-लिखकर योग्य बन गए, बहुत पैसे कमाएंगे। जिस माता-पिता ने आपको जन्म दिया, जिन गुरु ने आपको पढ़ा-लिखा योग्य बनाया, उनके प्रति अपने कर्तव्य मत भूलिए। आज हम समाज में क्या देखते हैं। भारत जैसे देश में वृद्धाश्रम बढ़ रहे हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य किसी देश का क्या होगा। ये काम यूरोप में होते थे। अब भारत में भी होने लगे। आज हम माता-पिता को घर से ऐसे बाहर निकाल रहे हैं, जैसे दूध पीने के बाद गाय को सड़क या गौशाला में छोड़ देते हैं। यह भी पढ़ें- शिमलाना की रेखा पुंडीर को मिली पीएचडी की उपाधि हम डॉक्टर हैं, इंजीनियर हैं, प्रोफेसर हैं, पायलट हैं, बैरिस्टर हैं, जज हैं, सब कुछ हैं, लेकिन मानवता कहां रह गई। स्वामी विवेकानंद सुभारत...
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