घर में इकलौते होने के बाद भी देशसेवा को चुना, सेवा करते हुए थे शहीद
एटा, अगस्त 14 -- देश के लिए लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हुए शहीद राजेश यादव को बचपन से ही सेना में जाने का जज्बा था। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में हुए पाकिस्तान की तरफ हुए हमले के दौरान वह शहीद हो गए थे। उनकी शहादत आज भी गांव और परिवार के लिए गर्व और पीड़ा दोनों का विषय है। जलेसर क्षेत्र के गांव रेजुआ निवासी राजेश यादव शहीद हुए थे। शहीद की पत्नी श्वेता यादव वर्तमान में जिला सैनिक कल्याण बोर्ड में नौकरी कर रही हैं। वह बताती हैं कि 26 साल की उम्र में ही वह सेना में भर्ती हो गए थे। पत्नी श्वेता यादव बताती है कि वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। बचपन से ही देश की सेवा करने का सपना देखते थे। इसी संकल्प के साथ उन्होंने सेना में भर्ती होकर पूरी निष्ठा और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं और अंततः मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान...
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