एटा, जनवरी 6 -- हिमानी घर में इकलौती थी और लाड़ली भी थी। इनका एक भाई है। इनके पिता मनोज जिरसमी पुल पर दुकान करते हैं। सुबह दुकान पर चले जाते है। पिता ने बताया कि दुकान पर जाने से पहले बिटियां ही खाना लाकर देती थी। कोई ऐसी बात नहीं थी, जिसे बिटियां छिपाती हो। कभी भी बेटी को डांटा भी नहीं था। ग्रामीणों की माने तो हिमानी घर से बाहर भी नहीं निकलती थी। ज्यादातर घर में ही रहती थी। मुनेन्द्र घर में सबसे छोटे थे। इनसे बड़े तीन भाई और भी है। सबसे बड़े भाई सतेन्द्र, नीतू साबुन, सर्फ बेचने का काम करते हैं तो वहीं तीसरे नंबर का भाई रतनेश लखनऊ में सौर्य ऊर्जा प्लेट लगाने का काम करते हैं। जानकारी मिलते ही वह भी घर आने के लिए निकल चुका है। पिता राजपाल को बेटा मुनेन्द्र से काफी उम्मीद थी। बेटा पढ़ने में काफी होशियार था। पढ़ाई में मन लगने के कारण पिता भी ...