नई दिल्ली, सितम्बर 2 -- बच्चे को पढ़ाना सिर्फ किताब खोलकर सवाल-जवाब करवाने का नाम नहीं है। कई बार बच्चा किसी बात को जल्दी नहीं समझ पाता, बार-बार वही सवाल पूछता है या पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता। ऐसे में माता-पिता का धैर्य जवाब देने लगता है और गुस्सा आ जाता है। लेकिन मारना या चिल्लाना बच्चे के लिए पढ़ाई को और मुश्किल बना सकता है। इसलिए कोशिश करें कि पढ़ाई का समय उसके लिए डर का नहीं, सीखने और समझने का समय बने। इसके लिए आपको बस पढ़ाने का तरीका थोड़ा बदलना है। कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर आप बच्चे को बिना मारे और बिना चिल्लाए पढ़ा सकते हैं। आइए जानते हैं -रोज का एक फिक्स शेड्यूल बनाएं बच्चे के लिए पढ़ाई का एक तय समय रखना बहुत जरूरी है। ऐसा टाइम टेबल बनाएं जिसमें पढ़ाई के साथ खेलने और आराम करने का समय भी शामिल हो। जब बच्चे को पहले से पता होगा ...