जहानाबाद, दिसम्बर 30 -- मखदुमपुर, निज संवाददाता। ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश कुटीर उद्योग धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं । जिसका कारण नए-नए वैज्ञानिक उपकरणों का आविष्कार, प्राकृतिक संसाधनों के जगह प्लास्टिक की बनी वस्तुओं का उपयोग है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र के कुंभकार, बढ़ई , बास से चटाई, सूप, झाड़ू आदि बनाने वाले कारीगर आज बेरोजगार हो रहे हैं। एक समय था जो हर गांव में इन लोगों को रोजगार मिल जाता था। लेकिन आज के समय में भी लोहार लोगों को काम मिल रहा है। लोहा से बनी वस्तुओं का उपयोग अभी भी घरों में किया जा रहा है, खास कर कृषि कार्य में। इसलिए लोहार लोगों का परंपरागत धंधा अभी भी चल रहा है। घरों में उपयोग होने वाले लोहे के तवा, चीलोही, कड़ाही, डब्बू, चिमटा की मांग पहले भी थी और आज भी है। सभी घरों के रसोई घर में लोहे की चीज अवश्य रहती है। वहीं कृषि कार्...