रांची, जुलाई 24 -- रांची। विशेष संवाददाता झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 1984 के कथित दहेज मांग मामले में कामाख्या नारायण तिवारी को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा रद्द कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस कानूनी संशोधन के आधार पर दोषी करार दिया गया था, वह घटना के बाद लागू हुआ था और उसे पूर्वव्यापी (रेट्रोस्पेक्टिव) प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता।

अदालत के निर्णय का सारांश जस्टिस अरुण कुमार राय की अदालत ने प्रार्थी की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष दहेज निषेध अधिनियम की धारा 4 के तहत आरोप सिद्ध करने में विफल रहा। कोर्ट ने कहा कि यह मामला वर्ष 1979 में हुए विवाह और वर्ष 1984 में कथित दहेज मांग से जुड़ा है, जबकि दहेज निषेध (संशोधन) अधिनियम, 1986 के माध्यम से धारा 4 में विवाह के बाद किसी भी समय की गई दहेज मांग को भी अपराध की परिभाषा ...