नई दिल्ली, अक्टूबर 11 -- वृंदावन के इस सड़क से जाने वाला लगभग हर शख्स एक पल को वहां रूकता, हाथ जोड़ता और आंख बंद करके कुछ देर के लिए ध्यान करता। कुछ लोग धूल भरी उस सड़क पर लेटकर प्रमाण कर रहे थे तो कुछ लोग उस धूल को अपने माथे पर लगा रहे थे। कइयों की आंखों से तो आंसू भी निकल रहे थे। ये नजारा कुछ ऐसा ही था जैसे लोग मंदिर में भगवान के सामने करते नजर आते हैं, पर यहां कोई मंदिर नहीं था। शुरुआत में तो मैं, वहां दंडवत कर रहे लोगों की गिनती कर रहा था लेकिन समय के साथ इसमें इतने लोग शामिल होते गए कि, मैं गिनती भी भूल गया। ये सारा नजारा मुझे वृंदावन के वराह घाट स्थित श्री राधाहित केलि कुंज आश्राम के बाहर दिखा। केलि कुंज आश्राम यहां के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महराज से जुड़ा हुआ है। वृंदावन के वराह घाट स्थित श्री राधाहित केलि कुंज आश्राम फिलहाल चर्चा ...