जमशेदपुर, फरवरी 18 -- पूर्वी सिंहभूम जिले के सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर स्मार्ट क्लास की मशीनें तो लगा दी गईं, लेकिन हकीकत यह है कि ये उपकरण अब धूल फांक रहे हैं। जिले के लगभग 950 मध्य विद्यालयों में शिक्षा की डिजिटल तस्वीर बदलने का दावा किया गया था, पर जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण की कमी और तकनीकी बाधाओं ने इनमें से 50 प्रतिशत स्कूलों में इस महत्वाकांक्षी योजना के पहिये जाम कर दिए हैं। स्थिति यह है कि जिले के आधे से ज्यादा शिक्षकों को अबतक इन उपकरणों को चलाने का बुनियादी प्रशिक्षण भी नहीं मिला है, जिससे स्मार्ट बोर्ड महज सफेद पर्दे बनकर रह गए हैं। झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ पूर्वी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह कहते हैं कि विभाग ने तकनीक तो भेज दी, लेकिन उसे चलाने का कौशल विकसित करना भूल गया। जेंसी का काम ...
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